
दीवाली आने को है और मौसम का रूख बदला है। कहीं खुशी है तो कही गम है। दुकानों में दीये, तोरण, लक्ष्मी-गणेश, बर्तन और मेवे के सजावटी डिब्बों की भरमार है। बाजारों की उठा-पटक के बाद हर ओर एक आशा कि किरण है कि शायद फिर वही रौनक आएगी। कहीं लाठियों की मार है, जो कहीं मंदी की मार। त्योहारों में घर जाने को बेताब लोग स्टेशनों पर गाडि़यों के इंतजार में है। दीये की रोशनी की तरह दिल में आस जगाए है। उमंग और उत्साह के साथ घर पर दीप जलाएंगे।

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