
चकचौंध भरी रौशनी में दुनिया को दिखाती नही
स्वत्रंत राज में इन्सान इन्सान के खून से नहाता है
लाशो के ढेर पर खरी है इंसानियत
बाजारों में सेल के भाव बिकती है
इस देश में वफादारी की कसौटी पर संदेह देखती है
अब तो लोकतंत्र की मन्दिर में भी सेल लगने लगी है
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