ये जिंदगी एक सवाल है?
फिर भी नाज है इस पर
राह चलते मुसाफिर को देखो
लगता है खुशियों ये भरा संसार
पर नजदीक से देखो
तो खुली किताब है
ये जिंदगी एक सवाल है?
किसी को मंजिल मिली
तो किसी आशाएं
इस मायाजाल में सब है समाएं
कोई कर जाता है मंजिल के खातिर कुर्बानी
तो अपनों की खातिर।
फिर भी ये जिंदगी एक सवाल है?
पर क्या जाने उस दर्द को
जो दिल में रह जाता है
अंदर झाकों को मोम सी पिघली जिंदगी है
पर चेहरे पर मासूमियत भरी खुशी है
तो भी ये जिंदगी सवाल है?
Thursday, January 15, 2009
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
SP_A0201.gif)
4 comments:
ये जिंदगी एक सवाल है?
फिर भी नाज है इस पर
राह चलते मुसाफिर को देखो
लगता है खुशियों ये भरा संसार
पर नजदीक से देखो
तो खुली किताब है
ये जिंदगी एक सवाल है?
बहुत sunder कहा है आपने
मोनिका जी,
आपके विचार जैसा आपने अपने प्रोफ़ाइल मे लिखा ,वैसे ही सिन्पल हैं.दूसरो के बारे मे सोचने वाले अब बहुत कम रह गये है.आपको मेरी शुभकामनायें
इरफ़ान
व्यंग्यचित्रकार्
बहुत अच्छा लिखा है आपने...जिंदगी एक सवाल है जिसका जवाब आज तक नहीं मिला...क्यूँ की उसका कोई एक जवाब नहीं है...
नीरज
जिंदगी को पता नही क्या क्या नाम दिये गए। आज एक और नाम।
राह चलते मुसाफिर को देखो
लगता है खुशियों ये भरा संसार
पर नजदीक से देखो
तो खुली किताब है
ये जिंदगी एक सवाल है?
बहुत उम्दा लिखा है। और हाँ ये word verification हटा दे तो अच्छा रहेगा।
Post a Comment